Headlines

20 करोड़ के ‘अमृत’ पर लापरवाही का दाग: सिमुलतला स्टेशन चकाचक, पर बीच प्लेटफॉर्म पर महीनों से पड़ा मलबे का अंबार।

​विशेष संवाददाता, झाझा (जमुई):केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ के तहत जमुई जिले के सिमुलतला रेलवे स्टेशन का ₹20 करोड़ की भारी-भरकम लागत से कायाकल्प तो कर दिया गया है, लेकिन विभागों की आपसी खींचतान और घोर लापरवाही के कारण यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्टेशन को विश्वस्तरीय सुविधाओं और बेहतरीन सौंदर्यीकरण के साथ नया रूप दिया गया है, जिसकी यात्री सराहना भी कर रहे हैं। परंतु, इस चमक-दमक के बीच एक बड़ी समस्या स्टेशन की खूबसूरती पर पानी फेर रही है।​प्लेटफॉर्म के बीचों-बीच बिखरा है कबाड़ और निर्माण सामग्री​स्थानीय यात्रियों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्टेशन के ठीक बीच में बने पुराने फुट ओवरब्रिज (FOB) को तोड़े जाने के बाद उसका मलबा महीनों से वहीं प्लेटफॉर्म पर बिखरा पड़ा है। इस मलबे के कारण न केवल यात्रियों को आने-जाने में भारी असुविधा हो रही है, बल्कि इसके पीछे गंदगी और कबाड़ का अंबार भी लग गया है। नए और चमचमाते स्टेशन के बीचों-बीच फैला यह कबाड़ यात्रियों के अनुभव को पूरी तरह खराब कर रहा है। जैसा कि _13348703008925135863.png में भी देखा जा सकता है, प्लेटफॉर्म के मुख्य हिस्से पर कंक्रीट के बड़े टुकड़े और लोहे की नुकीली छड़ें बिखरी पड़ी हैं, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।​”यह मेरा काम नहीं”… जिम्मेदारी से भाग रहे जिम्मेदार अधिकारी​जब इस घोर लापरवाही के संबंध में मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक (जसीडीह) अवध नंदन से बात की गई, तो उन्होंने संवेदनहीन रवैया अपनाते हुए अपनी जिम्मेदारी से साफ पल्ला झाड़ लिया। उन्होंने कहा कि, “यह मलबा इंजीनियरिंग विभाग का है और वे (स्वास्थ्य विभाग) इसमें कुछ नहीं कर सकते”।​करोड़ों रुपये खर्च कर स्टेशन को सुंदर बनाने के दावों के बीच, विभिन्न सरकारी विभागों के बीच समन्वय (Coordination) की यह कमी साफ बयां करती है कि ‘यह मेरा काम नहीं है’ वाले पुराने ढर्रे के कारण जनता को कितनी परेशानी झेलनी पड़ती है।​यात्रियों ने पूछा- कब मिलेगी इस नरक से मुक्ति?​स्टेशन पर आने वाले यात्रियों का कहना है कि एक तरफ तो स्टेशन को आधुनिक रूप देने के बड़े-बड़े होर्डिंग लगाए गए हैं, वहीं दूसरी तरफ बुनियादी साफ-सफाई और सुरक्षा को ताक पर रख दिया गया है। अब यह बड़ा सवाल बना हुआ है कि रेलवे प्रशासन की कुंभकर्णी नींद कब खुलेगी, इस मलबे को कब हटाया जाएगा और सिमुलतला स्टेशन पर आने वाले यात्रियों को इस समस्या से कब निजात मिलेगी?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *