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तृणमूल सांसदों की कथित बगावत, दलबदल कानून और परिसीमन की राजनीति के बहाने मोदी सरकार की रणनीति पर वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र शर्मा का विश्लेषण।

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देश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों, तृणमूल कांग्रेस में कथित टूट, दलबदल विरोधी कानून, परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक जैसे मुद्दों को लेकर वरिष्ठ पत्रकार एवं ‘लोकलहर’ के संपादक राजेंद्र शर्मा ने अपने विस्तृत आलेख में केंद्र सरकार और भाजपा की रणनीतियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं।लेख में दावा किया गया है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली सफलता के बाद भाजपा संसद में भी अपने राजनीतिक प्रभाव का विस्तार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। लेखक के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के कुछ सांसदों की बगावत और उनके संभावित नए राजनीतिक समीकरणों के पीछे व्यापक राजनीतिक रणनीति काम कर रही है।आलेख में दलबदल विरोधी कानून, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों के राजनीतिक घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए यह तर्क दिया गया है कि सत्ता पक्ष अपने पक्ष में संस्थागत और राजनीतिक परिस्थितियाँ निर्मित करने का प्रयास कर रहा है।लेखक ने परिसीमन, महिला आरक्षण विधेयक और आगामी लोकसभा चुनावों को भी इसी व्यापक राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में जोड़ते हुए कहा है कि विपक्ष की एकजुटता और संघीय ढांचे की मजबूती भविष्य की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।(यह लेखक के निजी विचार हैं। SKN Bharat इन विचारों से सहमत अथवा असहमत होने का दावा नहीं करता।)— SKN Bharat | सच की नज़रफेसबुक पोस्ट के लिए आकर्षक लाइन:”क्या भारतीय जनतंत्र पर मंडरा रहा है नया संकट? वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र शर्मा के इस विश्लेषण में जानिए सत्ता, दलबदल और परिसीमन की राजनीति के पीछे की पूरी कहानी।”

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