प्रशासन पर जताया अटूट विश्वास, बोलीं—अब डर नहीं, विकास और सुरक्षा के साथ बदल रही जिंदगी।




जमुई। रक्षाबंधन के पावन अवसर पर जमुई में वर्षों पुराने भय और अविश्वास की तस्वीर बदलती नजर आई। जिले के अत्यंत सुदूरवर्ती एवं पूर्व के अति-नक्सल प्रभावित क्षेत्रों गुरमाहा, चोरमारा और मुसहरीटांड से मुख्यधारा में लौटे परिवारों की महिलाओं ने शुक्रवार को समाहरणालय स्थित संवाद कक्ष में पहुंचकर जिला पदाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक सहित वरीय प्रशासनिक अधिकारियों की कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधा। महिलाओं ने इस अवसर पर प्रशासन के प्रति अपना विश्वास, आत्मीयता और सुरक्षा की भावना व्यक्त की।इस भावुक अवसर पर जिला पदाधिकारी ने महिलाओं के इस स्नेह और विश्वास पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि सुदूरवर्ती एवं पूर्व अति-नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की महिलाओं का स्वयं समाहरणालय पहुंचकर प्रशासन के प्रति विश्वास प्रकट करना जिला प्रशासन के निरंतर प्रयासों की सफलता का परिणाम है। उन्होंने कहा कि प्रशासन और जनता के बीच बना यह भावनात्मक जुड़ाव आगे भी मजबूत और अटूट बना रहे, इसके लिए लगातार प्रयास किए जाएंगे।जिला पदाधिकारी ने कहा कि इन क्षेत्रों के निवासियों के साथ विधानसभा चुनाव से ही निरंतर सीधा संवाद स्थापित किया जा रहा है। क्षेत्र में मौजूद मूलभूत नागरिक सुविधाओं की कमियों को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों का स्नेह और विश्वास केंद्र एवं राज्य सरकार की विकासपरक नीतियों तथा प्रशासन और जनता के बीच मजबूत हो रहे भरोसे का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

पहले पुलिस को देखकर छिपते थे, अब प्रशासन के साथ मनाते हैं पर्व’कार्यक्रम में पहुंचीं महिलाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके परिवार के सदस्यों के नक्सली गतिविधियों से बाहर निकलकर मुख्यधारा में लौटने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है।महिलाओं ने भावुक होकर बताया कि एक समय था जब नक्सली गतिविधियों के भय के कारण ग्रामीण पुलिस को देखते ही छिप जाया करते थे। आज परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। अब वे जिला प्रशासन के कार्यक्रमों में खुले तौर पर शामिल होते हैं और खुशी के साथ पर्व-त्योहार मनाते हैं।महिलाओं ने कहा कि जिस प्रकार परिवार में भाई अपनी बहनों और पूरे परिवार की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाते हैं, उसी प्रकार जिला पदाधिकारी और पुलिस अधीक्षक उनके दुर्गम क्षेत्रों में सुरक्षा के साथ विकास की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।उन्होंने बताया कि अब गांव के बच्चे नियमित रूप से विद्यालय जा रहे हैं। आशा कार्यकर्ताओं का चयन हुआ है तथा एम्बुलेंस एवं चिकित्सकीय सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं। घर-घर राशन वितरण और नल के माध्यम से शुद्ध पेयजल की आपूर्ति भी सुचारू रूप से संचालित हो रही है।भय से विश्वास तक का सफरगुरमाहा, चोरमारा और मुसहरीटांड जैसे पूर्व अति-नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की महिलाओं का बिना किसी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के स्वतः जिला मुख्यालय पहुंचकर प्रशासनिक अधिकारियों को रक्षा-सूत्र बांधना महज रक्षाबंधन का एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भय से विश्वास और अलगाव से विकास की ओर बढ़ते बदलाव की जीवंत तस्वीर है।वर्षों तक नक्सलवाद के साये में विकास की मुख्यधारा से दूर रहे इन इलाकों में सुरक्षा, बुनियादी सुविधाओं और प्रशासनिक पहुंच में आए बदलाव को महिलाओं ने अपने अनुभवों के माध्यम से सामने रखा। यह अवसर शासन, प्रशासन और आम जनता के बीच मजबूत होते विश्वास, भयमुक्त वातावरण तथा सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच रहे विकास की सकारात्मक अभिव्यक्ति बन गया।
