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बंगाल में बड़ा सियासी उलटफेर: TMC में बड़ी टूट, 20 बागी सांसद ‘नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी’ में होंगे शामिल; लोकसभा अध्यक्ष से की मुलाकात।

नई दिल्ली/कोलकाता:पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) में एक बहुत बड़ी टूट हो गई है। तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों ने पार्टी से अलग होने और ‘नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी’ में शामिल होने का फैसला किया है। इस बड़े सियासी घटनाक्रम के तहत बागी गुट के सांसदों ने रविवार को दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की और उन्हें एक औपचारिक पत्र सौंपा।​केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और स्पीकर ओम बिरला से मिले सांसद​तस्वीरों (जैसे कि 203833.jpg) के अनुसार, टीएमसी बागी गुट के 17 सांसद रविवार को पहले केंद्रीय मंत्री और बंगाल भाजपा प्रभारी भूपेंद्र यादव के घर पहुंचे। इसके बाद इन सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से उनके आवास पर मुलाकात की। सोशल मीडिया और लाइव ब्लॉग पर सामने आईं तस्वीरों (203837.jpg, 203838.jpg) में बागी सांसद सायनी घोष, यूसुफ पठान, और दीपक अधिकारी (देव) भी स्पीकर के साथ मुलाकात के दौरान नजर आए।​’NDA को हमारा समर्थन, देशहित में करेंगे काम’ – काकोली घोष​बैठक के बाद बागी सांसदों में शामिल वरिष्ठ नेता काकोली घोष दस्तीदार और सुदीप बंद्योपाध्याय ने मीडिया से बात करते हुए स्पष्ट किया कि टीएमसी के 20 सांसद नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी में विलय करने जा रहे हैं। काकोली घोष ने बड़ा बयान देते हुए कहा, “आगे हम देशहित में काम करेंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए (NDA) के साथ मिलकर आगे बढ़ेंगे।” उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके पास अब करीब 22 सांसदों का समर्थन है, जबकि इससे पहले 19 सांसदों के हस्ताक्षर वाला एक पत्र भी सामने आया था। वहीं, सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि ‘असली टीएमसी’ का फैसला अब कोर्ट करेगा।​ममता बनर्जी के समर्थन में उतरे कीर्ति आजाद और सागरिका घोष​इस बड़ी टूट के बीच ममता बनर्जी के वफादार सांसदों ने भी मोर्चा संभाल लिया है। बागी सांसदों से ठीक पहले टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद और सागरिका घोष ने भी लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की। बैठक के बाद कीर्ति आजाद ने कहा, “महाराष्ट्र में जो हुआ वह गलत था। इसलिए बागी नेताओं के खिलाफ लोकसभा अध्यक्ष को एक औपचारिक आवेदन सौंप दिया गया है, जिसकी हार्ड कॉपी स्पीकर कार्यालय ने प्राप्त कर ली है।” उन्होंने आगे कहा कि पार्टी सिर्फ 20 सांसदों या 60 विधायकों से नहीं बनी है, ममता बनर्जी ने ही इस पार्टी को खड़ा किया है, इसलिए वही असली पार्टी हैं।​अभिषेक बनर्जी ने स्पीकर को लिखा पत्र​पार्टी में मची इस रार के बीच टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक पत्र लिखा है। उन्होंने मांग की है कि सदन में टीएमसी को केवल एक ही पार्टी के रूप में देखा जाए और किसी भी दूसरे बागी गुट को मान्यता न दी जाए। बता दें कि पश्चिम बंगाल से टीएमसी के कुल 28 लोकसभा सांसद हैं। इसके अलावा राज्यसभा के 13 सांसदों में से 4 पहले ही अपने पद और पार्टी से इस्तीफा दे चुके हैं।​सायनी घोष और माला रॉय पर गिरी गाज​इस सियासी घमासान के बीच सायनी घोष और माला रॉय रविवार को कोलकाता से दिल्ली पहुंचीं। हालांकि, दिल्ली पहुंचते ही सायनी घोष ने कहा कि वह अभी कुछ नहीं कहेंगी और सही समय आने पर ही बोलेंगी। इस बगावत के बाद ममता बनर्जी ने सायनी घोष और माला रॉय को पार्टी के पदों से हटा दिया है। सायनी घोष इससे पहले टीएमसी की यूथ विंग की अध्यक्ष थीं। दूसरी तरफ, बागी सांसद जगदीश चंद्र बसुनिया ने बताया कि उनका गुट सोमवार को भी लोकसभा स्पीकर से मुलाकात करेगा।​कानूनी नोटिस का दौर शुरू​मामला सिर्फ बगावत तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि अब यह कानूनी लड़ाई में तब्दील होता दिख रहा है। काकोली घोष दस्तीदार के बेटे बैद्यनाथ ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, महुआ मोइत्रा और कल्याण बनर्जी को लीगल नोटिस भेजा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने बारासात विधानसभा सीट से अपने लिए या अपनी मां के लिए कभी कोई टिकट नहीं मांगा था।​ममता से अलग हुए कुछ प्रमुख बागी सांसदों के

बगावत करने वाले मुख्य सांसदों में शामिल हैं:​काकोली घोष दस्तीदार (बारासात)​जगदीश चंद्र बसुनिया (कूचबिहार)​खलीलुर रहमान (जांगीपुर)​यूसुफ पठान (बहरामपुर)​दीपक अधिकारी – देव (घाटाल)​कालीपद सोरेन (झाड़ग्राम)​जून मालिया (मेदिनीपुर)​अरूप चक्रवर्ती (बांकुड़ा)​इस बड़ी टूट के बाद पश्चिम बंगाल और देश की राजनीति में भूचाल आना तय माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि लोकसभा स्पीकर इस मामले पर क्या कानूनी और संवैधानिक कदम उठाते हैं।

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