
तीन दिवसीय विशेष शिविर के अंतिम दिन उमड़ी रैयतों की भीड़, अब मुआवजा बढ़ाने की मांग पर कमिश्नर के फैसले का इंतजार।

जमुई न्यूज़, राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच)-333ए निर्माण परियोजना को गति देने के उद्देश्य से जमुई जिला प्रशासन द्वारा आयोजित तीन दिवसीय विशेष भू-अर्जन शिविर का शनिवार को सफलतापूर्वक समापन हो गया। 23 से 25 जुलाई तक कनौदी सरकार पंचायत भवन में आयोजित इस शिविर की शुरुआत भले ही धीमी रही, लेकिन अंतिम दो दिनों में बड़ी संख्या में रैयतों ने पहुंचकर अपने दस्तावेज जमा किए और अपनी आपत्तियां भी दर्ज कराईं।शिविर के पहले दिन कोई आवेदन प्राप्त नहीं हुआ था। राजस्व अधिकारी बी.एन. झा, राजस्व कर्मचारी मिथिलेश कुमार और परवेज आलम पूरे दिन रैयतों की प्रतीक्षा करते रहे। हालांकि दूसरे और तीसरे दिन स्थिति पूरी तरह बदल गई। पंचायत भवन में ग्रामीणों की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिली। दूसरे दिन 18 से 20 आवेदन प्राप्त हुए, जबकि शिविर समाप्त होने तक कुल 60 से 70 के करीब आवेदन जमा किए जा चुके थे। इससे भू-अधिग्रहण प्रक्रिया को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।जिला प्रशासन ने श्रीटांड़, खुरंडा, सिमुलतला, घोरपारन और सियांटांड गांव के प्रभावित भूमि स्वामियों से अपील की है कि वे अपने सभी आवश्यक भू-दस्तावेज शीघ्र जमा करें, ताकि भूमि अधिग्रहण एवं मुआवजा वितरण की प्रक्रिया समय पर पूरी की जा सके।इधर, भू-अर्जन प्रक्रिया के बीच मुआवजा राशि को लेकर रैयतों में असंतोष भी देखने को मिला। स्थानीय भूमि स्वामियों का कहना है कि सरकार द्वारा निर्धारित मुआवजा दर वर्तमान बाजार मूल्य की तुलना में काफी कम है।स्थानीय रैयतदार अजीत सिंह ने कहा, “हम विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उचित और न्यायसंगत मुआवजा पाना हमारा अधिकार है।”रैयतों ने अपनी आपत्तियां दर्ज कराते हुए मामला प्रमंडलीय आयुक्त (कमिश्नर), मुंगेर के समक्ष भी रखा है। उनका कहना है कि वे राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण और क्षेत्र के विकास के पक्षधर हैं, लेकिन उनकी आजीविका से जुड़ी जमीन का उचित मूल्य मिलना चाहिए। अब सभी की निगाहें कमिश्नर के निर्णय पर टिकी हैं, जिसके बाद रैयत आगे की रणनीति तय करेंगे।
