
जनसंपर्क अभियान के तहत सिमुलतला पहुंचे यूनियन नेता, रेल प्रशासन की नीतियों का किया विरोध, कर्मचारियों से एकजुट होने का आह्वान।

सिमुलतला (जमुई)। रेलवे के निजीकरण, नए लेबर कोड और रेल कर्मचारियों पर कथित दमनकारी नीतियों के विरोध में ईस्टर्न रेलवे मेन्स यूनियन (ईआरएमयू) ने शुक्रवार को सिमुलतला रेलवे स्टेशन पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। राष्ट्रव्यापी जनसंपर्क अभियान के तहत पहुंचे यूनियन नेताओं ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए रेल प्रशासन की नीतियों की आलोचना की और कर्मचारियों से अपने अधिकारों की लड़ाई के लिए एकजुट होने की अपील की।आल इंडिया रेलवे मेन्स फेडरेशन (एआईआरएफ) के सहायक महासचिव एवं ईस्टर्न रेलवे मेन्स यूनियन के महामंत्री अमित कुमार घोष ने कहा कि रेलवे में लगातार ठेका प्रथा को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे स्थायी कर्मचारियों के हित प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने ट्रैकमैनों की कार्य परिस्थितियों पर चिंता जताते हुए कहा कि उनसे 20-20 किलोमीटर तक पेट्रोलिंग कराई जा रही है, जबकि उन्हें पर्याप्त आराम और अवकाश भी नहीं मिल रहा है। उनके अनुसार यह व्यवस्था कर्मचारियों के मानसिक और शारीरिक शोषण को बढ़ावा दे रही है।महामंत्री ने बताया कि ईस्टर्न रेलवे मेन्स यूनियन वर्ष 1920 से रेल कर्मचारियों के अधिकारों के लिए संघर्ष करती आ रही है। उन्होंने कहा कि संगठन आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने तथा महंगाई भत्ते (डीए) को मूल वेतन में शामिल करने जैसी मांगों को लेकर भी आंदोलन के लिए तैयार है।उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा और कथित दमनकारी नीतियों के विरोध में यह जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है, ताकि रेल कर्मचारियों को जागरूक कर एकजुट किया जा सके।कार्यक्रम के दौरान यूनियन कार्यकर्ताओं ने लाल झंडों और ईस्टर्न रेलवे मेन्स यूनियन, जसीडीह शाखा के बैनर के साथ रेलवे प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया।इस अवसर पर अखिलेश कुमार, विभूति कुमार, डीएन कामती, सुधीर राय, अनिल राय, माधव चंद झा सहित जसीडीह शाखा के कई पदाधिकारी, स्थानीय रेल कर्मचारी और बड़ी संख्या में यूनियन सदस्य उपस्थित रहे।
