








जमुई। विश्वप्रसिद्ध श्रावणी मेले के पावन अवसर पर जमुई की धरती एक बार फिर शिवभक्ति और जनआस्था के रंग में रंगने को तैयार है। प्राचीन काल से ‘शैवतीर्थ’ के रूप में पूजित इस पावन भूमि से होकर गुजरने वाले कांवरियों की सुगम, सुरक्षित और सुखद यात्रा सुनिश्चित करने के लिए जमुई जिला प्रशासन पूरी निष्ठा, संवेदनशीलता और सजगता के साथ तैयार है।

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि हर श्रद्धालु की सुविधा और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रशासन का प्रयास है कि जमुई से होकर गुजरने वाले प्रत्येक कांवरिया को आत्मीयता, सम्मान और घर जैसी सुरक्षा का एहसास हो।प्रशासन ने कहा कि किसी भी व्यवस्था की सफलता केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए स्थानीय नागरिकों का सहयोग भी बेहद जरूरी है। श्रावणी मेला केवल प्रशासनिक तैयारियों की परीक्षा नहीं, बल्कि जमुईवासियों की सामाजिक जिम्मेदारी और नागरिक कर्तव्यों की भी कसौटी है।जिला प्रशासन ने जिलेवासियों से अपील की है कि ‘अतिथि देवो भवः’ की भावना को अपने व्यवहार में उतारते हुए श्रद्धालुओं के साथ सहयोग करें। मेले के दौरान स्वच्छता, सुरक्षा, शांति और आपसी सौहार्द बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाएं।प्रशासन का कहना है कि जब प्रशासनिक संकल्प के साथ जनता का सहयोग और समर्पण जुड़ता है, तभी जमुई की सेवा और आतिथ्य की संस्कृति एक मिसाल बनती है। इससे जिले की गौरवशाली पहचान और मजबूत होगी तथा धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन के मानचित्र पर जमुई को नई पहचान मिलेगी।जिला प्रशासन ने जिलेवासियों से आह्वान किया है—आइए, हाथ से हाथ मिलाएं और अपनी माटी की गरिमा, सेवा और आतिथ्य की परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएं।
