
जमुई: बिहार सरकार के संकल्प “विकसित भारत – समृद्ध बिहार” को धरातल पर क्रियान्वित करने के उद्देश्य से आज जमुई जिले की सभी ग्राम पंचायतों में “पंचायत विकास दिवस” का अत्यंत गरिमामयी एवं भव्य आयोजन किया गया। जनभागीदारी के माध्यम से ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर, सुदृढ़ और उत्तरदायी बनाने के इस महाअभियान के तहत ग्रामीण, स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं जिला प्रशासन ने एक ही मंच पर उपस्थित होकर माननीय प्रधानमंत्री जी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ का सीधा प्रसारण सुना। जमुई प्रखंड के गरसंडा पंचायत में आयोजित इस कार्यक्रम जिले के प्रभारी सचिव डॉ कौशल किशोर (भा.प्र.से.) एवं जिला पदाधिकारी श्री नवीन (भा.प्र.से.) ने भाग लेकर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया।इस अवसर पर जिला पदाधिकारी ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार की यह महत्वाकांक्षी पहल जन आकांक्षाओं और जन-सुविधाओं को केंद्र में रखकर तैयार की गई है, जिसके तहत अब जनता को अपनी समस्याओं के निराकरण के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिला प्रशासन स्वयं जनता के द्वार पर पहुंचकर, उनके बीच बैठकर और विमर्श कर पंचायतों के चहुंमुखी सशक्तिकरण की दिशा में पूरी संवेदनशीलता से कार्य करेगा। जिला पदाधिकारी ने इस मंच से अपनी संघर्ष और सफलता की कहानी साझा करने वाली जीविका दीदी संगीता देवी का प्रेरक उदाहरण देते हुए उपस्थित महिलाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने रेखांकित किया कि जिस महिला को कभी अपने परिवार के भरण-पोषण में अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, आज वह अपने दृढ़ संकल्प और उद्यमशीलता से न केवल स्वयं आर्थिक रूप से समृद्ध हुई हैं, बल्कि 15 से 20 अन्य महिलाओं को रोजगार देकर उनके जीवन को भी संवार रही हैं। समाज के समग्र, सतत और समावेशी विकास में महिलाओं की अपरिहार्य भूमिका पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि जब एक महिला सशक्त होती है, तब एक पूरा परिवार सशक्त होता है, और परिवारों के सशक्त होने से क्रमशः गांव, जिला, राज्य और अंततः पूरा राष्ट्र प्रगति के पथ पर अग्रसर होता है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि जिला प्रशासन ऐसे प्रगतिशील और विकासात्मक माहौल को निरंतर बनाए रखने के लिए हमेशा एक सहयोगी की भूमिका में तत्पर रहेगा।इसी क्रम में मुख्य अतिथि सह जिले के प्रभारी सचिव ने अपने व्यापक प्रशासनिक अनुभवों को साझा करते हुए पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम में महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन और सामाजिक सहभागिता का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत कर स्थानीय महिलाओं को प्रेरित किया। उन्होंने नीति-निर्धारण में महिलाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि वास्तविक प्रगति की सार्थकता तभी सुनिश्चित होगी जब परिवार और समाज में महिलाओं को बराबरी के अवसर मिलेंगे। राज्य सरकार की ‘महिला हितैषी पंचायत’ की परिकल्पना को साकार करने हेतु उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय से पंचायती राज संस्थाओं तथा बिहार पुलिस बल में महिलाओं को दिए गए ऐतिहासिक आरक्षण का अधिकतम लाभ उठाने और सफल लोगों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने की अपील की। आगे उन्होंने कहा कि सरकार के दूरदर्शी प्रयासों से बुनियादी ढांचा लगभग प्रत्येक पंचायत तक पहुंच चुका है और जो आंशिक कमी बची है, उसे भी समयबद्ध तरीके से पूर्ण कर लिया जाएगा। उन्होंने वर्तमान समय की मांग पर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि अब हमें भौतिक विकास से आगे बढ़कर मानव विकास सूचकांक में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने की आवश्यकता है, जो तभी संभव है जब प्रत्येक परिवार में स्वास्थ्य, शिक्षा और संसाधनों का बेहतर प्रबंधन हो। परिवार के स्तर पर हुआ यही गुणात्मक सुधार आगे चलकर पंचायत, जिला और राज्य के सूचकांक को बेहतर बनाएगा, जिससे वैश्विक पटल पर बिहार का नाम मानव विकास के क्षेत्र में शीर्ष पर स्थापित होगा।इस वृहद और जन-उन्मुखी आयोजन को और अधिक प्रभावी एवं सुग्राह्य बनाने के उद्देश्य से विभिन्न ग्राम पंचायतों में सूचना, शिक्षा और संचार गतिविधियों के तहत नुक्कड़ नाटकों, लोकगीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से नशा मुक्ति, बालिका शिक्षा, दहेज उन्मूलन, बाल विवाह निषेध तथा महिला स्वावलंबन के प्रति व्यापक सामाजिक चेतना का प्रसार किया गया, जिसे आम जनता ने अत्यंत उत्साहपूर्वक सराहा। निःसंदेह प्रत्येक महीने के अंतिम रविवार को आयोजित होनेवाले इस कार्यक्रम की निरंतरता भविष्य में जमुई को सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता और सुदृढ़ बुनियादी ढांचे के निर्माण के बेहतर कार्ययोजना बनाने से लेकर यहां के सतत, समावेशी और समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा। फलस्वरूप जमुई का हर परिवार खुशहाल होगा, हर गांव समृद्ध होगा और अंततः पूरा बिहार खुशहाली एवं समृद्धि के नए युग में प्रवेश करेगा।

