

सद्भाव की नई मिसाल: जनसहयोग और आपसी मोहब्बत से संपन्न हुई खुरांडा की जामिया मस्जिद की ढलाई।

मातृशक्ति की भागीदारी: महिलाओं ने अपनी बचत की पूंजी सौंपकर बटोरीं दुआएं, उलेमाओं ने दिया अमन-चैन का संदेश।



जमुई/सिमुलतला:जमुई जिले के सिमुलतला प्रखंड अंतर्गत खुरांडा पंचायत के खुरांडा गाँव से आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर सामने आई है। रविवार को खुरांडा गाँव में नवनिर्मित जामिया मस्जिद की छत की ढलाई का कार्य बेहद गरिमामयी, धार्मिक श्रद्धा और आपसी सौहार्द के माहौल में संपन्न हुआ। गाँव के इस साझा प्रयास ने पूरे इलाके के सामने सामाजिक एकता की एक नई मिसाल पेश की है।गाँव का जनसहयोग और महिलाओं का बड़ा योगदानइस मस्जिद के निर्माण में खुरांडा गाँव के आम लोगों के जनसहयोग और आपसी तालमेल की बड़ी भूमिका रही है। ग्रामीणों ने इस नेक कार्य के लिए अपनी मेहनत की कमाई से यथाशक्ति आर्थिक योगदान दिया। इस पुनीत कार्य में सबसे सराहनीय भूमिका गाँव की महिलाओं की रही। उन्होंने अपने घरेलू खर्चों और व्यक्तिगत बचत से बचाए हुए पैसों का योगदान देकर इस कार्य में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई और सवाब हासिल करने की भावना से सहयोग किया।मस्जिद की छत तले गूंजा अमन और भाईचारे का संदेशढलाई के इस विशेष मौके पर जमुई के प्रख्यात आलिम मौलाना असलम राजा फैजी, हाफिज जफरुल हसन और मौलवी अब्बास सहित कई उलेमा-ए-इकराम ने शिरकत की। उलेमाओं ने मस्जिद की अहमियत पर रोशनी डालते हुए समाज में अमन, चैन और आपसी भाईचारा बनाए रखने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि इबादतगाहें समाज को जोड़ने और नेक राह पर चलने की प्रेरणा देती हैं। इसके बाद मस्जिद की तरक्की और पूरे क्षेत्र की खुशहाली के लिए विशेष दुआ मांगी गई।”यह मस्जिद केवल इबादत का केंद्र नहीं, बल्कि हमारे गाँव की एकता, शिक्षा और सामाजिक सौहार्द का एक मजबूत प्रतीक बनेगी।”— खुरांडा के ग्रामीणों की सामूहिक आवाजग्राउंड रिपोर्ट: जहाँ आपसी आदर ही सबसे बड़ा धर्म बना’एसकेएन भारत’ की टीम जब मौके पर पहुँची, तो वहाँ का माहौल बेहद शांतिपूर्ण और गरिमापूर्ण था। गाँव के विभिन्न वर्गों और समुदायों के लोगों ने एक-दूसरे के प्रति सम्मान और सहयोग की भावना प्रदर्शित की। आपसी सौहार्द और एक-दूसरे के प्रति आदर भाव के कारण पूरा कार्यक्रम बेहद सुगमता और शांति से संपन्न हुआ, जिसने पूरे क्षेत्र को एकता का एक सकारात्मक संदेश दिया है।इस अवसर पर खुरांडा पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि सज्जाद अंसारी, हाजी लाल मोहम्मद, तस्लीम अंसारी समेत मस्जिद कमेटी के सभी सम्मानित सदस्य मौजूद रहे, जिन्होंने इस आयोजन को सफल बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। खुरांडा गाँव के इस सराहनीय और शांतिपूर्ण प्रयास से पूरे सिमुलतला क्षेत्र में खुशी और संतोष का माहौल है। खुरांडा गाँव ने यह साबित किया है कि जब इरादे नेक हों और दिल में एक-दूसरे के प्रति सम्मान हो, तो बड़े से बड़ा काम भी बेहद खूबसूरती और शांति से संपन्न हो जाता है। महिलाओं की छोटी-छोटी बचत से लेकर गाँव के हर वर्ग का नैतिक और सामाजिक समर्थन इस बात का गवाह है कि आपसी विश्वास ही समाज की सबसे बड़ी ताकत है। खुरांडा पंचायत का यह शांतिपूर्ण प्रयास पूरे जिले के लिए अनुकरणीय है।

