बिहार के ‘मिनी शिमला’ सिमुलतला में हरियाली पर आरा, लकड़ी माफियाओं के निशाने पर दशकों पुराने पेड़।

oplus_8396800

मिनी शिमला की हरियाली पर माफियाओं का आरा, जिम्मेदारों की चुप्पी से उठे बड़े सवाल।

सैलानियों की ऐतिहासिक कोठियों से यूकेलिप्टस और शीशम के पेड़ काटे गए, मुखिया ने अनुमति देने से किया इनकार; पर्यावरण प्रेमियों में आक्रोश।

सिमुलतला (जमुई)। बिहार का ‘मिनी शिमला’ कहे जाने वाले प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सिमुलतला की प्राकृतिक सुंदरता पर इन दिनों पर्यावरण के दुश्मनों की काली नजर पड़ गई है। ठंडी आबोहवा, घने जंगलों और हरियाली के लिए मशहूर यह इलाका अब लकड़ी माफियाओं के निशाने पर है। सैलानियों की ऐतिहासिक कोठियों और उनके परिसरों में खड़े दशकों पुराने विशालकाय पेड़ों की लगातार अवैध कटाई की जा रही है।ताजा मामला एक सैलानी की कोठी का है, जहां भू-माफिया और लकड़ी कारोबारियों की कथित मिलीभगत से कई विशाल यूकेलिप्टस और शीशम के पेड़ काट दिए गए। कुछ ही घंटों में वर्षों पुरानी हरियाली मलबे में तब्दील हो गई।मौके पर मौजूद बाहरी लकड़ी कारोबारियों ने दावा किया कि पेड़ काटने के लिए कनौदी पंचायत के मुखिया से लिखित अनुमति ली गई है। हालांकि, जब इस संबंध में स्थानीय मुखिया से बात की गई तो उन्होंने किसी भी प्रकार की अनुमति या लिखित आदेश जारी करने से साफ इनकार कर दिया। इससे अवैध कटाई के खेल पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।मामले की सूचना मिलने पर नवनियुक्त फॉरेस्टर नितेश कुमार ने बताया कि विभागीय कर्मियों को जांच के लिए मौके पर भेजा गया है। वहीं, जमुई के डीएफओ तेजस जायसवाल ने कहा कि यदि जमीन निजी है तो वन विभाग की कार्रवाई सीमित है और ऐसे मामलों में पुलिस कार्रवाई करेगी। उनके अनुसार वन अधिनियम मुख्यतः सरकारी या वन भूमि पर पेड़ों की कटाई पर लागू होता है।डीएफओ के इस बयान के बाद स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों में नाराजगी बढ़ गई है। उनका कहना है कि यदि अवैध कटाई पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो सिमुलतला की पहचान रही हरियाली धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी। लोगों ने जिला प्रशासन से लकड़ी माफियाओं और अवैध कटाई के सिंडिकेट पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।स्कैन भारत | सच की नजर

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *