Headlines

सच्ची कहानी आज का प्रेरक प्रसंग ♨️कड़वा वचन

सेठ जी बहुत जल्दी क्रोधित हो जाते थे। जरा-सी बात पर गुस्सा और फिर गुस्से में ऐसे कड़वे शब्द, जो सामने वाले के दिल को चीर जाते।उनके परिवार वाले भी उनसे परेशान थे। कई बार घर में लोग उनसे बात करना तक बंद कर देते, लेकिन कुछ दिनों बाद फिर सब सामान्य हो जाता। समय बीतता रहा, मगर सेठ जी का स्वभाव नहीं बदला।

उनके परिवार वाले भी उनसे परेशान थे। कई बार घर में लोग उनसे बात करना तक बंद कर देते, लेकिन कुछ दिनों बाद फिर सब सामान्य हो जाता। समय बीतता रहा, मगर सेठ जी का स्वभाव नहीं बदला।एक दिन परिवार के लोग एक साधु महाराज के पास पहुँचे और अपनी परेशानी बताई।

उन्होंने कहा, “महाराज, हमारे सेठ जी बहुत अच्छे इंसान हैं, लेकिन उनका क्रोध और कड़वी वाणी हम सबको दुखी कर देती है। कोई ऐसा उपाय बताइए, जिससे उनका स्वभाव बदल सके।

”साधु महाराज मुस्कुराए और बोले, “उन्हें मेरे पास भेजना।”

परंतु सेठ जी साधु-संतों पर ज्यादा विश्वास नहीं करते थे। इसलिए वे साधु के पास नहीं गए।कुछ दिनों बाद साधु महाराज स्वयं उनके घर पहुँच गए। उनके हाथ में एक गिलास था, जिसमें एक गहरा रंग का द्रव्य भरा हुआ था।साधु को देखकर सेठ जी का गुस्सा फिर उभर आया, लेकिन परिवार वालों के सामने उन्होंने खुद को शांत रखा।साधु महाराज ने कहा, “सेठ जी, मैं हिमालय से आपके लिए एक विशेष औषधि लेकर आया हूँ। इसे थोड़ा-सा चखकर देखिए।”

सेठ जी ने गिलास उठाया और जैसे ही उस द्रव्य को जीभ से लगाया, उनका चेहरा बिगड़ गया।“अरे! यह तो बहुत कड़वा है। आखिर इसमें क्या है?”साधु महाराज शांत स्वर में बोले—“सेठ जी, आपकी जीभ तो जानती है कि कड़वा क्या होता है।”सेठ जी बोले, “हाँ, बिल्कुल! यह तो बहुत कड़वा है।”साधु महाराज ने कहा—“अगर आप सचमुच कड़वाहट को समझते हैं, तो फिर अपने शब्दों में इतनी कड़वाहट क्यों भरते हैं?”सेठ जी चुप हो गए।साधु ने आगे कहा—“कड़वा पदार्थ केवल कुछ क्षण के लिए आपकी जीभ का स्वाद बिगाड़ता है, लेकिन कड़वे शब्द किसी के मन को लंबे समय तक दुखी कर सकते हैं। और याद रखिए—दूसरों को चोट पहुँचाने से पहले कटु वचन हमारी अपनी वाणी को दूषित करते हैं।”सेठ जी को अपनी गलती समझ आ गई।उनकी आँखें नम हो गईं। वे साधु महाराज के चरणों में झुककर बोले—“महाराज, आज आपने मेरी आँखें खोल दीं। मैं वचन देता हूँ कि अब अपनी वाणी पर संयम रखूँगा और किसी को अपने शब्दों से दुख नहीं पहुँचाऊँगा।”

“महाराज, आज आपने मेरी आँखें खोल दीं। मैं वचन देता हूँ कि अब अपनी वाणी पर संयम रखूँगा और किसी को अपने शब्दों से दुख नहीं पहुँचाऊँगा।”घरवालों के चेहरे पर खुशी लौट आई।कुछ देर बाद सेठ जी ने मुस्कुराते हुए पूछा—“महाराज, लेकिन यह इतना कड़वा पदार्थ आखिर है क्या?”साधु महाराज मुस्कुराए और बोले—“नीम के पत्तों का अर्क!”सेठ जी भी मुस्कुरा दिए।🌿 शिक्षाकड़वी बात कहने से पहले एक बार जरूर सोचिए।क्योंकि कड़वा स्वाद कुछ देर में खत्म हो जाता है, लेकिन कड़वे शब्दों की चोट कई बार वर्षों तक दिल में रहती है।इसलिए बोलिए कम, लेकिन बोलिए मीठा।क्रोध में मौन रहना भी एक बड़ी समझदारी है।“वाणी ऐसी बोलिए, जिससे किसी का दिल न दुखे; क्योंकि शब्द वापस नहीं आते, लेकिन उनका असर लंबे समय तक रहता है।”🌸 सदैव प्रसन्न रहिए — जो प्राप्त है, पर्याप्त है।जिसका मन मस्त है — उसके पास समस्त है।प्रस्तुति: SKN भारत — सच की नज़र

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *