
जमुई। नक्सलवाद के लंबे दौर को पीछे छोड़ते हुए जमुई जिला अब विकास और समृद्धि की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। जिले में पर्यटन की अपार संभावनाओं को विकसित करने और स्थानीय लोगों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन लगातार नई पहल कर रहा है।इसी कड़ी में जिला पदाधिकारी ने गिद्धेश्वर–गरही मुख्य मार्ग पर अरुणमाबाग पंचायत के परासी गांव के समीप स्थित विशिष्ट पठारनुमा टीले का विस्तृत भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र की प्राकृतिक खूबसूरती, भौगोलिक विशेषताओं और पर्यटन की संभावनाओं का जायजा लिया।जिला प्रशासन का उद्देश्य क्षेत्र में मौजूद प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक स्थलों और ऐतिहासिक धरोहरों को एक सूत्र में जोड़कर एकीकृत पर्यटन कॉरिडोर विकसित करना है। इसके माध्यम से न केवल जमुई को पर्यटन के राष्ट्रीय और वैश्विक मानचित्र पर पहचान दिलाने की कोशिश होगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।

परासी गांव के समीप स्थित यह पठारी क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण बेहद आकर्षक है। टीले के शीर्ष से चारों ओर फैली हरी-भरी घाटियां, दूर तक दिखाई देती प्राकृतिक हरियाली और शांत ग्रामीण परिवेश पर्यटकों को आकर्षित करने की क्षमता रखते हैं।इससे पूर्व भी जिला पदाधिकारी द्वारा इस क्षेत्र में स्थित पंचभूर झरना से लेकर घनवेरिया के प्रसिद्ध पेड़ा दुकानों तक का निरीक्षण किया जा चुका है। लगातार किए जा रहे इन स्थलीय निरीक्षणों से स्पष्ट है कि जिला प्रशासन पर्यटन विकास के लिए जमीनी स्तर पर संभावनाओं को तलाशते हुए एक व्यापक रोडमैप तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है।मौके पर जिला पदाधिकारी ने कहा कि जमुई के इस क्षेत्र का पर्वतीय और पठारी भू-भाग कृषि के लिए सीमित अवसर उपलब्ध कराता है। ऐसे में पर्यटन यहां के लोगों के जीवन स्तर में सुधार का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। लगभग ढाई दशकों तक नक्सलवाद का दंश झेल चुके इस क्षेत्र को पर्यटन के जरिए विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि क्षेत्र में केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना नहीं है, बल्कि प्रकृति प्रेमियों और एडवेंचर टूरिज्म के शौकीन पर्यटकों को ध्यान में रखते हुए ट्रैकिंग और साहसिक पर्यटन की संभावनाओं को भी विकसित किया जाएगा। उद्देश्य यह है कि यहां आने वाले पर्यटक धार्मिक स्थलों के दर्शन के साथ-साथ प्राकृतिक वातावरण का आनंद भी उठा सकें।जिला पदाधिकारी ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को स्थल के सौंदर्यीकरण और योजनाबद्ध विकास के लिए तत्काल विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया।प्रस्तावित एकीकृत पर्यटन कॉरिडोर के विकसित होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। होटल, परिवहन, स्थानीय उत्पाद, हस्तशिल्प, गाइड सेवा और अन्य पर्यटन आधारित गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।जिला प्रशासन की यह पहल जमुई के प्राकृतिक और ऐतिहासिक संसाधनों को विकास से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यदि योजनाबद्ध तरीके से पर्यटन सुविधाओं का विकास होता है, तो आने वाले समय में जमुई न केवल बिहार बल्कि देश के प्रमुख प्राकृतिक और एडवेंचर पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान बना सकता है।
