
निजी स्कूलों की मनमानी: सिमुलतला में मिनी ट्रक और स्कूल वैन में भीषण भिड़ंत, दो छात्र घायल, चालक की हालत नाजुक।


बिना नंबर प्लेट की गाड़ी: सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि मासूम बच्चों को ढोने वाली इस स्कूल वैन पर कोई नंबर प्लेट ही नहीं थी। बिना रजिस्ट्रेशन सड़क पर बच्चों की गाड़ी दौड़ना सीधे तौर पर परिवहन नियमों को ठेंगा दिखाना है।



निजी स्कूलों की मनमानी: सिमुलतला में मिनी ट्रक और स्कूल वैन में भीषण भिड़ंत, दो छात्र घायल, चालक की हालत नाजुकबड़ा हादसा: बिना नंबर प्लेट और बिना अटेंडेंट के 14 बच्चों को लेकर दौड़ रही थी ‘दिव्या पब्लिक स्कूल’ की मैजिक वैन, मलबे से निकाला गया चालकसिमुलतला (विशेष संवाददाता):सिमुलतला थाना क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा सामने आया है, जिसने निजी स्कूलों की मनमानी और सुरक्षा के दावों की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। झाझा की ओर से आ रही रंग-पेंट से लदी एक मिनी ट्रक (रजिस्ट्रेशन नंबर- JH 15 AJ 6634) और दिव्या पब्लिक स्कूल की मैजिक वैन के बीच आमने-सामने की जोरदार टक्कर हो गई। इस भीषण भिड़ंत में वैन में सवार दो मासूम बच्चे घायल हो गए, जबकि स्कूल वैन का चालक मुकेश यादव मलबे में ही जिंदगी और मौत के बीच जूझता रहा।हादसे में घायल दोनों छात्रों की पहचान अभिनंदन कुमार (गादी टेलवा) और पीयूष कुमार (कुरावा) के रूप में हुई है। स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से दोनों बच्चों को तुरंत पास के एक क्लीनिक में भर्ती कराया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई।लोहे के मलबे में फंसा रहा चालकटक्कर इतनी भयानक थी कि स्कूल वैन का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया। हादसे के बाद वैन चालक मुकेश यादव केबिन में ही बुरी तरह फंस गया। घटनास्थल पर मौजूद स्थानीय लोगों ने सूझबूझ दिखाते हुए काफी जद्दोजहद की और वैन के मलबे को तोड़कर किसी तरह चालक को बाहर निकाला। मुकेश के पैरों में गंभीर चोटें आई हैं और सीने में तेज दर्द की शिकायत है। स्थानीय स्तर पर प्रारंभिक इलाज के बाद उन्हें बेहतर उपचार के लिए देवघर (झारखंड) रेफर कर दिया गया।घटना की सूचना मिलते ही सिमुलतला पुलिस अवर निरीक्षक सीताराम यादव तुरंत दलबल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभाला। दूसरी गाड़ी (मिनी ट्रक) के चालक की पहचान सुधीर यादव के रूप में हुई है।चश्मदीद की जुबानी”अचानक ब्रेक की तेज आवाज आई और फिर जोरदार धमाका हुआ। जब हम दौड़े तो देखा कि बच्चों की गाड़ी का आगे का हिस्सा पूरी तरह दबा हुआ था और ड्राइवर अंदर फंसा था। बिना नंबर की गाड़ियों में मासूम बच्चों को इस तरह मौत के सफर पर ले जाना कानूनन और इंसानियत के नाते कहां तक उचित है?”— शंभू सिंह, स्थानीय चश्मदीदपड़ताल: जांच में खुली पोल, सामने आईं प्रबंधन की 5 बड़ी लापरवाहियांहादसे के बाद जब स्थानीय स्तर पर पड़ताल की गई, तो स्कूल प्रबंधन की ऐसी गंभीर लापरवाहियां सामने आईं जो किसी भी अभिभावक का कलेजा कंपा दें:बिना नंबर प्लेट की गाड़ी: सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि मासूम बच्चों को ढोने वाली इस स्कूल वैन पर कोई नंबर प्लेट ही नहीं थी। बिना रजिस्ट्रेशन सड़क पर बच्चों की गाड़ी दौड़ना सीधे तौर पर परिवहन नियमों को ठेंगा दिखाना है।अटेंडेंट का गायब होना: नियमों के मुताबिक स्कूली वाहनों में एक अटेंडेंट का होना अनिवार्य है, लेकिन गाड़ी में बच्चों की देखभाल के लिए कोई उपचालक या कंडक्टर मौजूद नहीं था।क्षमता से अधिक बच्चे: चश्मदीदों के अनुसार, वैन में क्षमता से अधिक बच्चे थे। पूरी गाड़ी में कुल 13 से 14 बच्चों को लादा गया था।फर्स्ट एड बॉक्स नदारद: इतनी बड़ी दुर्घटना हो गई, लेकिन आपातकालीन स्थिति के लिए गाड़ी में प्राथमिक उपचार का कोई साधन तक उपलब्ध नहीं था।लचर सिस्टम पर खड़े हुए गंभीर सवालसवाल सिर्फ यह नहीं है कि गलती मिनी ट्रक चालक सुधीर यादव की थी या वैन चालक मुकेश यादव की। असली सवाल उस लचर सिस्टम पर है जिसने सिमुलतला क्षेत्र में कुकुरमुत्ते (मशरूम) की तरह बाढ़ की शक्ल में खुले इन प्राइवेट स्कूलों को मनमानी की खुली छूट दे रखी है। फीस के नाम पर अभिभावकों की जेब से मोटी रकम वसूलने वाले ये नामी-गिरामी स्कूल बच्चों की सुरक्षा के नाम पर सिर्फ मौत का सफर परोस रहे हैं। बिना नंबर प्लेट की गाड़ी, बिना उपचालक का सफर और बिना फर्स्ट एड बॉक्स के चल रहे इस दिव्या पब्लिक स्कूल प्रबंधन पर अब प्रशासन क्या कानूनी फंदा कसता है, इस पर पूरे इलाके की नजरें टिकी हैं

