







जमुई, 16 अगस्त 2026। स्वतंत्रता दिवस की पावन संध्या पर स्थानीय रावणेश्वर हॉल में जिला प्रशासन द्वारा आयोजित भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम कला, संस्कृति और सामाजिक बदलाव का अद्भुत संगम बन गया। जिला पदाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक की गरिमामयी उपस्थिति में खचाखच भरे सभागार में सरकारी विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने गायन, वादन, नृत्य और अभिनय की शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि प्रस्तुतियों में रिकॉर्डेड संगीत का सहारा नहीं लिया गया। संबंधित विद्यालयों के छात्र-छात्राओं और संगीत शिक्षकों ने एक ही मंच पर लाइव गायन, वादन और नृत्य प्रस्तुत कर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इससे सरकारी विद्यालयों में संगीत शिक्षकों की नियुक्ति के सकारात्मक परिणाम भी स्पष्ट रूप से सामने आए।गुरमाहा और चोरमारा की बेटियों ने बिखेरा लोक संस्कृति का रंगकार्यक्रम का सबसे भावुक और गौरवपूर्ण क्षण तब आया, जब सुदूरवर्ती गुरमाहा और चोरमारा क्षेत्र की बेटियां मंच पर पहुंचीं। बच्चियों ने स्थानीय वाद्ययंत्रों की धुन पर पारंपरिक लोक नृत्य प्रस्तुत कर अपनी समृद्ध लोक संस्कृति की झलक दिखाई। उनकी प्रस्तुति पर पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा।इसके बाद इको-टूरिज्म का संदेश देने वाले लोकगीत “कुएं का ठंडा जल, पीपल की छांव रे, रुक जाओ परदेसी, आज मेरे गांव रे” पर बच्चियों ने मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया। प्रस्तुति ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।यह प्रस्तुति केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि जमुई के प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन की संभावनाओं को दुनिया के सामने रखने वाला आत्मीय संदेश भी बनी। जिस क्षेत्र में कभी जाने से लोग हिचकिचाते थे, आज उसी क्षेत्र की बेटियां अपनी कला के माध्यम से लोगों को जमुई की प्राकृतिक सुंदरता देखने का संदेश दे रही हैं।देशभक्ति और सामाजिक जागरूकता का संदेशकार्यक्रम में अन्य सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों ने भी देशभक्ति और सामाजिक चेतना से जुड़ी प्रस्तुतियां दीं। शहीद भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद के त्याग एवं बलिदान पर आधारित नाटक ने दर्शकों में राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत किया। वहीं बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा पर छात्रा की भावपूर्ण प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया।कजरी, संथाली नृत्य, नाटक तथा विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर आधारित प्रस्तुतियों में जमुई की लोक संस्कृति, लोक रंग और देशभक्ति का सुंदर समावेश देखने को मिला।सरकारी विद्यालयों में बदलाव की झलकस्वतंत्रता दिवस की यह सांस्कृतिक संध्या सरकारी विद्यालयों के बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए जिला प्रशासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सार्थकता का प्रमाण भी बनी। बीते एक वर्ष में बच्चों की प्रतिभा को मंच देने और उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने के प्रयासों के साथ वर्तमान जिला शिक्षा पदाधिकारी के पिछले एक महीने के निरंतर परिश्रम का असर भी कार्यक्रम में दिखाई दिया।कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि जब सरकारी तंत्र दृढ़ संकल्प के साथ बदलाव के लिए काम करता है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव धरातल पर दिखाई देने लगता है। जमुई के सुदूर गांवों से निकलकर बेटियों का घर की दहलीज पार कर जिला प्रशासन के आधिकारिक मंच पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करना सामाजिक बदलाव और प्रगतिशील सोच की महत्वपूर्ण तस्वीर पेश करता है।स्वतंत्रता दिवस की यह सांस्कृतिक संध्या प्रगतिशील और बदलते जमुई की नई तस्वीर को सामने लाने वाली यादगार शाम बन गई।
